🕌 'यादगार इमाम हुसैन बनाम जवाज़े ताज़ियादारी' पुस्तक का होगा प्रकाशन, ज़माँ ग्रुप की नई पहल

मकनपुर (उत्तर प्रदेश): मकनपुर स्थित ऐतिहासिक ख़ानकाह ज़िन्दा शाह मदार के सज्जादा नशीन पीर सूफ़ी सैय्यद रईसुज़्ज़माँ जाफ़री मदारी ने जानकारी दी कि ज़माँ ग्रुप की ओर से जल्द ही यादगार इमाम हुसैन बनाम जवाज़े ताज़ियादारी शीर्षक से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का हिंदी संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। यह पुस्तक हुज़ूर मुहक्किक़-ए-अस्र, शमशीर-ए-मदारियत हज़रत अल्लामा व मौलाना मुफ़्ती पीर सैय्यद मुनव्वर अली हुसैनी मदारी साहब द्वारा लिखी गई है।

उन्होंने बताया कि पुस्तक का उद्देश्य ताज़ियादारी के धार्मिक और ऐतिहासिक पक्ष को सरल एवं सहज हिंदी भाषा में आम लोगों तक पहुँचाना है। विशेष रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया गया है जो उर्दू पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। पुस्तक में ताज़ियादारी के समर्थन में धार्मिक संदर्भों, ऐतिहासिक तथ्यों और विभिन्न प्रमाणों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

पीर सूफ़ी सैय्यद रईसुज़्ज़माँ जाफ़री मदारी ने कहा कि वर्तमान समय में जब विभिन्न माध्यमों से अहलेबैत की शिक्षाओं और इतिहास को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ऐसे समय में समाज तक सही जानकारी पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने ज़माँ ग्रुप का गठन किया, जो अहलेबैत की शिक्षाओं, इतिहास और आध्यात्मिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है।

उन्होंने बताया कि ज़माँ ग्रुप के सक्रिय सदस्यों में हाफ़िज़ कबीर आलम मदारी, क़ारी जाबिर मदारी, आफ़ताब आलम अंसारी मदारी, शेख़ ताजुद्दीन, नूर मोहम्मद, सैय्यद आमिन अली, नईम मदारी, मोहम्मद यूनुस मदारी, मोहम्मद शब्बीर ख़ान मदारी, सूफ़ी अमन नवाज़ मदारी, सद्दाम हुसैन मदारी तथा शेख़ मुजीबुर्रहमान (कालू बाबा) सहित कई लोग शामिल हैं, जो इस धार्मिक और सामाजिक अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि इमाम हुसैन (रज़ि.) के जीवन, उनके संदेश और ताज़ियादारी की परंपरा को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। ज़माँ ग्रुप ने इसे अहलेबैत से मोहब्बत रखने वालों के लिए एक अनमोल तोहफ़ा बताया है।

पीर साहब ने यह भी घोषणा की कि इस पुस्तक के बाद हुज़ूर सैय्यदना सैय्यद बदीउद्दीन अहमद क़ुत्बुल मदार ज़िन्दा शाह मदार (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु) के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित एक विस्तृत पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी, जिससे नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और योगदान की जानकारी मिल सके।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ताज़ियादारी का मूल उद्देश्य इमाम हुसैन और शहीदान-ए-कर्बला की कुर्बानी को याद रखना और उनके संदेश को समाज तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (रज़ि.) का संदेश केवल मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए है। उनका जीवन सत्य, न्याय, मानव गरिमा, स्वतंत्रता, सब्र और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि अगर समाज इमाम हुसैन की शिक्षाओं सच्चाई, इंसाफ़, मज़लूमों का साथ देने और आपसी भाईचारे को अपने जीवन में अपनाए, तो समाज में अमन, सद्भाव और खुशहाली को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश यह सिखाता है कि सत्य की राह कठिन हो सकती है, लेकिन अंततः सत्य की ही विजय होती है।

अंत में पीर सूफ़ी सैय्यद रईसुज़्ज़माँ जाफ़री मदारी ने दुआ की कि अल्लाह तआला सभी को इमाम हुसैन (रज़ि.) के सब्र, तक़वा, इंसाफ़ और उच्च चरित्र से सीख लेकर अपने जीवन में अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।


🔎 मुख्य बिंदु (Key Points)

  • ज़माँ ग्रुप जल्द प्रकाशित करेगा "यादगार इमाम हुसैन बनाम जवाज़े ताज़ियादारी" का हिंदी संस्करण।

  • पुस्तक के लेखक हैं मुफ़्ती पीर सैय्यद मुनव्वर अली हुसैनी मदारी

  • उद्देश्य ताज़ियादारी और इमाम हुसैन के संदेश को सरल हिंदी में जन-जन तक पहुँचाना।

  • उर्दू न पढ़ पाने वाले पाठकों के लिए पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी होगी।

  • अगली पुस्तक हज़रत सैय्यद बदीउद्दीन अहमद क़ुत्बुल मदार के जीवन पर प्रकाशित की जाएगी।

  • पीर सूफ़ी सैय्यद रईसुज़्ज़माँ जाफ़री मदारी ने इमाम हुसैन के संदेश को पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताया।