दिल्ली पुलिस और आम जनता के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए, पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार स्थित *ओसवाल भवन* में एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम को *'प्रोजेक्ट संगम'* का नाम दिया गया, जो इसके उद्देश्य को सार्थक रूप से दर्शाता है—यानी पुलिस और जनता का मिलन। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाना और क्षेत्र की यातायात समस्याओं का मिलनसार समाधान ढूंढना था। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए पूर्वी रेंज (Eastern Range) के *डीसीपी (DCP) के. रमेश जी* मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने स्थानीय निवासियों और पुलिस कर्मियों में एक नई ऊर्जा का संचार किया।
● जनभागीदारी और सामुदायिक जुड़ाव
'प्रोजेक्ट संगम' की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापक जनभागीदारी रही। इस कार्यक्रम में पूर्वी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से आए *रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA)* के पदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और समर्पित *सोशल वर्कर्स* ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विचार गोष्ठी के दौरान आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में यातायात के दबाव, अवैध पार्किंग और सड़कों पर होने वाले अतिक्रमण जैसी समस्याओं को सीधे उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा। डीसीपी के. रमेश जी ने न केवल इन समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना, बल्कि उनके त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस अकेले व्यवस्था नहीं सुधार सकती; इसके लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग अनिवार्य है।
● कला के माध्यम से जागरूकता: नुक्कड़ नाटक
कार्यक्रम को केवल भाषणों तक सीमित न रखकर इसे रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए *नुक्कड़ नाटक* का भी आयोजन किया गया। कलाकारों ने अपनी सजीव प्रस्तुति के माध्यम से सड़क सुरक्षा के नियमों, जैसे—हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट का प्रयोग करना, रेड लाइट जंप न करना और शराब पीकर गाड़ी न चलाने के संदेशों को बहुत ही सरल और मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया। नाटक के दृश्यों ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि एक छोटी सी लापरवाही किस प्रकार पूरे परिवार की खुशियों को उजाड़ सकती है। ओसवाल भवन में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और यातायात नियमों के पालन का संकल्प लिया।
● पुलिस और जनता का बदलता स्वरूप
इस विचार गोष्ठी के माध्यम से दिल्ली पुलिस का एक मानवीय और मित्रवत चेहरा सामने आया। अक्सर पुलिस और जनता के बीच एक संवादहीनता की स्थिति बनी रहती है, जिसे 'प्रोजेक्ट संगम' ने तोड़ने का काम किया है। डीसीपी के. रमेश जी ने अपने संबोधन में कहा कि:
"पुलिस और जनता जब हाथ मिलाते हैं, तभी एक सुरक्षित और व्यवस्थित समाज का निर्माण होता है। प्रोजेक्ट संगम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसका लक्ष्य सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।"
● निष्कर्ष: भविष्य की राह
विवेक विहार में आयोजित यह गोष्ठी एक मील का पत्थर साबित हुई है। आरडब्ल्यूए और सोशल वर्कर्स ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आम आदमी के मन से पुलिस का डर कम होता है और उनमें कानून के प्रति सम्मान बढ़ता है। कार्यक्रम के अंत में यातायात नियमों की शपथ ली गई और यह विश्वास जताया गया कि पूर्वी दिल्ली में यातायात की स्थिति को बेहतर बनाने में यह 'संगम' अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। ओसवाल भवन से विदा लेते हुए हर प्रतिभागी के मन में एक नई जिम्मेदारी का भाव था—एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित दिल्ली बनाने की जिम्मेदारी।
पूर्वी दिल्ली से कमल गुरनानी की रिपोर्ट, क्राइम इंडिया न्यूज़