🗳️ UP SIR में 16.18 लाख वोटर्स का डेटा वेबसाइट से गायब होने का दावा, रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता डेटा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। The Reporters’ Collective की 6 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित जांच रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के दौरान उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जिनके आवेदन का विस्तृत डेटा उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में Form 6 आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी थी। लेकिन वेबसाइट पर उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर केवल 71.38 लाख आवेदनों का विवरण मिला। दूसरी ओर, अंतिम मतदाता सूची में 84.3 लाख नए मतदाता जोड़े जाने की बात सामने आई है। इससे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आवेदनों और अंतिम सूची में जोड़े गए मतदाताओं के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 16.18 लाख आवेदन ऐसे थे, जिनकी जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी। रिपोर्टर्स कलेक्टिव के मुताबिक, उसने स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए उपलब्ध Form 6 डेटा को डाउनलोड और विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में पाया गया कि बड़ी संख्या में आवेदन वेबसाइट पर दिखाई देने वाले डेटा में शामिल नहीं थे।

84.3 लाख नाम जुड़े, लेकिन सार्वजनिक डेटा में 71.38 लाख आवेदन

रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक किए गए 71.38 लाख Form 6 आवेदनों के मुकाबले अंतिम मतदाता सूची में 84.3 लाख लोगों को जोड़ा गया। यानी 12.92 लाख अधिक मतदाता ऐसे हैं, जिनके आवेदन का विवरण उपलब्ध कराए गए डेटा से मेल नहीं खाता।

रिपोर्ट का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए Form 6 आवेदन आवश्यक होता है। ऐसे में सार्वजनिक आंकड़ों में दिखाई देने वाले आवेदनों और अंतिम सूची में शामिल मतदाताओं की संख्या के बीच अंतर ने सवाल खड़े किए हैं।

16.18 लाख आवेदनों का जिक्र, लेकिन विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं

The Reporters’ Collective के अनुसार, चुनाव आयोग ने एक 7 मार्च की प्रेस रिलीज में SIR के शुरुआती चरण में 16.18 लाख लोगों द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किए जाने का उल्लेख किया था। लेकिन इन आवेदनों की विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र स्तर पर विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कानून और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित दावों और आपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि संबंधित आवेदन की जांच और आपत्ति की प्रक्रिया पारदर्शी रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, इन 16.18 लाख आवेदनों का विस्तृत डेटा उपलब्ध नहीं होने से यह पता लगाना मुश्किल है कि ये मतदाता किन विधानसभा क्षेत्रों या मतदान केंद्रों से संबंधित हैं।

SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे

उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 2.89 करोड़ नामों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों के आधार पर हटाया गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया।

रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के पहले दिए गए बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि Form 6 के कई आवेदन उन लोगों की ओर से आए थे जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से हट गए थे।

चुनाव आयोग से मांगा गया स्पष्टीकरण

The Reporters’ Collective ने 16.18 लाख मतदाताओं के डेटा को लेकर उत्तर प्रदेश के CEO और चुनाव आयोग से सवाल किए। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकाशन के समय तक उसे इस संबंध में विस्तृत जवाब नहीं मिला था। वहीं UP CEO की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि डेटा में कोई mismatch नहीं है और समस्या रिपोर्ट की व्याख्या में है।

इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 16.18 लाख आवेदनों का विस्तृत डेटा सार्वजनिक रिकॉर्ड में क्यों दिखाई नहीं दे रहा है और अंतिम मतदाता सूची में शामिल नामों का पूरा मिलान किस तरह किया गया। चुनाव आयोग या उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से इस रिपोर्ट के सभी आरोपों पर विस्तृत स्पष्टीकरण आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और सत्यापन राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील विषय बन गया है।


🔎 मुख्य बिंदु

  • UP SIR में 16.18 लाख वोटर्स के डेटा को लेकर सवाल।

  • वेबसाइट पर 71.38 लाख Form 6 आवेदन उपलब्ध होने का दावा।

  • अंतिम सूची में 84.3 लाख मतदाताओं के जुड़ने की बात।

  • Reporters’ Collective ने डेटा में बड़ा अंतर होने का दावा किया।

  • UP CEO/ECI से मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया।