📍 नई दिल्ली / ढाका, 20 नवंबर 2025
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को International Crimes Tribunal (ICT) द्वारा “मानवता के खिलाफ अपराधों” के आरोपों में दोषी ठहराया गया है और उन्हें मृत्यु-दंड सुनाया गया है।
यह उन मामलों में से एक है जहाँ एक राजनैतिक नेता को अपने ही देश में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से इतनी गंभीर सज़ा मिली है — अगले कदमों व राजनीतिक असर को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं।
🔍 आरोप-प्रति उत्तर
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ICT ने 453 पृष्ठ के फैसले में पाया कि Hasina व अन्य आरोपियों ने पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति दी और छात्र विरोधियों पर गोलीबारी व आगजनी की घटनाओं में कथित रूप से भूमिका निभाई।
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बांग्लादेश में 46-दिन तक चले विरोध प्रदर्शनों में लगभग 1,400 लोग मारे गए थे, जिसमें UN के मानवाधिकार कार्यालय ने राज्य-सहायता प्राप्त “गंभीर व संगठित मानवाधिकार उल्लंघनों” के संकेत दिए थे।
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Hasina ने इन आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज किया है और कहा है कि उनके शासन काल में छात्रों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की इजाजत थी, लेकिन हालात बिगड़ गए थे।
🧭 आगे क्या होगा
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हस्तांतरण व प्रत्यर्पण की जटिलताएं
Hasina इस समय भारत में एक ग़ैर-स्थित स्थान में रह रही हैं। भारत-बांग्लादेश के प्रत्यर्पण संधि के अंतर्गत भारत द्वारा तुरंत हस्तांतरण की संभावना कम मानी जा रही है।
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राजनैतिक असर एवं चुनाव-परिदृश्य
इस फैसले से बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में उथल-पुथल हो सकती है — आगामी चुनाव में विपक्ष को नया फोर्स मिल सकता है, जबकि वर्तमान सरकार के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
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वैश्विक व क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
मानवाधिकार संगठनों ने पहले ही ICT पर निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता के सवाल उठाए थे। अब इस फैसले की वैधानिक वैधता और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर समीक्षा होगी।
✅ निष्कर्ष
Sheikh Hasina पर लगाई गई मृत्यु-सजा सिर्फ एक नेता की कहानी नहीं है — यह एक संकेत है कि बांग्लादेश में शासन-प्रशासन, न्याय-संस्था और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा किस दिशा में जा रहे हैं।
अगले हफ्तों में इस फैसले के प्रति सार्वजनिक प्रतिक्रिया, अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत-बांग्लादेश की कूटनीति नजर रखने योग्य होगी।