मुंबई: आज भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर नए निचले स्तर के करीब पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बना रहा।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिज़र्व की सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है, जिससे ईंधन और अन्य जरूरी वस्तुएं महंगी होने की आशंका है।
हालांकि, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप के संकेत दिए गए हैं, जिससे रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोका जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।