रुपये को संभालने के लिए RBI ने बेचे अरबों डॉलर, 6 हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार करीब $60 अरब घटा

18 अक्टूबर 2026 | डॉलर के मुकाबले रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया है। RBI ने डॉलर की बिक्री सहित कई कदम उठाए हैं। इस बीच, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 के रिकॉर्ड स्तर करीब 785.71 अरब डॉलर से घटकर 9 अक्टूबर तक 726.03 अरब डॉलर रह गया। यानी लगभग छह सप्ताह में इसमें करीब 59.68 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई।

विदेशी मुद्रा भंडार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे महंगे कच्चे तेल, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार से निकासी जैसे कारण बताए जा रहे हैं। जब आयातकों को डॉलर की जरूरत होती है और बाजार में डॉलर की मांग बढ़ जाती है, तब रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में RBI विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने और रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है।

रॉयटर्स की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्रियों और विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने अनुमान लगाया कि RBI ने 8 जून से डॉलर की बिक्री और डॉलर-रुपये स्वैप के जरिए करीब 75 से 80 अरब डॉलर का इस्तेमाल किया। यह बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है, RBI की ओर से जारी आधिकारिक खर्च का आंकड़ा नहीं।

9 अक्टूबर तक विदेशी मुद्रा भंडार घटकर $726 अरब

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 9 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.58 अरब डॉलर घटकर 726.03 अरब डॉलर रह गया। इससे पिछले सप्ताह भी इसमें करीब 12.95 अरब डॉलर की गिरावट आई थी।

ताजा सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां लगभग 7.14 अरब डॉलर और सोने के भंडार का मूल्य करीब 1.32 अरब डॉलर घटा।
हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में आई पूरी गिरावट को डॉलर की बिक्री नहीं माना जा सकता। इसमें RBI के बाजार हस्तक्षेप के अलावा विदेशी मुद्राओं के मूल्य में बदलाव और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी असर होता है।

रुपये को सहारा देने के लिए RBI के दूसरे कदम

रुपये पर दबाव कम करने के लिए RBI ने अक्टूबर में कुछ अतिरिक्त उपाय भी किए हैं। इनमें सरकारी तेल कंपनियों को डॉलर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था और कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर नियम सख्त करना शामिल है। इसका उद्देश्य खुले बाजार में डॉलर की मांग और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।

क्या रुपये की गिरावट रुक जाएगी?

RBI के हस्तक्षेप से रुपये को अस्थायी सहारा मिल सकता है, लेकिन आगे की दिशा वैश्विक तेल कीमतों, डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेश और आयात की मांग जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।

विदेशी मुद्रा भंडार में कमी पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन केवल एक आंकड़े से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि भारत के पास डॉलर खत्म हो रहे हैं। भंडार का पर्याप्त होना, संभावित आयात जरूरतें और भविष्य में डॉलर की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष: RBI रुपये को संभालने के लिए डॉलर की बिक्री और अन्य नीतिगत उपाय कर रहा है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया गिरावट बड़ी है, लेकिन इसमें बाजार हस्तक्षेप के साथ मूल्यांकन संबंधी बदलावों का भी योगदान है।

मुख्य बिंदु

  • 4 सितंबर 2026: विदेशी मुद्रा भंडार करीब $785.71 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर था।

  • 9 अक्टूबर 2026: भंडार घटकर करीब $726.03 अरब रह गया।

  • कुल गिरावट: लगभग $59.68 अरब, करीब छह सप्ताह में।

  • RBI का हस्तक्षेप: बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, जून से $75–80 अरब डॉलर बिक्री और स्वैप के जरिए इस्तेमाल किए गए।

  • महत्वपूर्ण तथ्य: भंडार में आई पूरी गिरावट को डॉलर की बिक्री नहीं माना जा सकता।