📍 नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025: रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin आज एक द्विवर्षीय औपचारिक दौरे पर भारत पहुँचे हैं — यह उनकी साल 2021 के बाद पहली भारत यात्रा है। इस दौरान 23वाँ वार्षिक India–Russia Annual Summit आयोजित होगा, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की उम्मीद जताई जा रही है।
🔎 चर्चा के मुख्य विषय
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ऊर्जा सहयोग — रूस से कच्चा तेल व LNG की आपूर्ति को स्थिर रखने की योजना; भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए यह समझौता अहम माना जा रहा है।
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रक्षा साझेदारी — पुराने रक्षा प्लेटफार्मों की मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स, और संभवतः नए विमानों/सिस्टम्स पर टेक्नोलॉजी हस्तांतरण — ताकि भारत-रूस रक्षा डील्स मजबूती से जारी रखें।
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व्यापार व आर्थिक समझौते — निर्यात-आयात संतुलन, रूसी प्रतिबंधों के बीच आर्थिक साझेदारी, और नए भुगतान/निर्यात-आयात मॉडल्स की संभावना।
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कूटनीति और विदेशी नीति संतुलन — भारत की नीति “बहु-सहयोग (Multi-Alignment)” को दर्शाते हुए, पश्चिमी देशों और रूस दोनों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की रणनीति।
🧭 इस दौरे का महत्व
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यह दौरा 1990s के बाद भारत-रूस रिश्तों की एक मजबूत पुष्टि है — जहाँ आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को फिर से प्राथमिकता दी जा रही है।
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वैश्विक भू-राजनीति, युद्ध व आर्थिक प्रतिबंधों के बीच यह दौरा यह दिखाता है कि भारत अपनी विदेशी नीति में स्वतंत्र, संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण बनाए रख रहा है।
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ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा स्वावलंबन और रक्षा उत्पादन/तकनीक हस्तांतरण के लिए यह समझौते भारत के दीर्घकालीन हित में काम कर सकते हैं।
📌 कहना होगा
इस दौरे के परिणाम सीधे तौर पर जनता तक नज़र नहीं आएँगे, लेकिन रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक साझेदारी और विदेश नीति में इसके असर सालों तक महसूस होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं — बल्कि भारत की दीर्घकालीन रणनीति, आत्मनिर्भरता व वैश्विक संतुलन की दिशा में एक मजबूत कदम हो सकता है।