नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज नए चुनावी खर्च नियंत्रण और पारदर्शिता मानकों को मंज़ूरी दी है। यह निर्णय चुनावों में भ्रष्टाचार और काले धन के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। नई गाइडलाइंस के तहत राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को अपने खर्च का विवरण 48 घंटों के भीतर ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य होगा।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि यह पहल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करेगी और मतदाताओं के विश्वास को बढ़ाएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उल्लंघन करने पर कड़ी वित्तीय सजाएँ और चुनाव से डि-लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार यह कदम 2026 विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र अर्थपूर्ण है और इससे चुनावी ट्रायलस में पारदर्शिता बढ़ेगी। विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
🔎 मुख्य बिंदु (Key Points)
-
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए चुनावी खर्च नियंत्रण गाइडलाइंस लागू किए हैं।
-
खर्च का विवरण अब 48 घंटों में ऑनलाइन सबमिट करना अनिवार्य होगा।
-
उल्लंघन पर सख्त वित्तीय सजाएँ और संभावित डि-लिस्टिंग।
-
यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से।
-
विपक्षी दलों ने इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी।