उज्जैन भूमि विवाद: मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे आरोपों से मध्य प्रदेश की राजनीति गरमाई

भोपाल/उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों कथित भूमि खरीद मामले को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद की है, जिससे राजनीतिक विवाद गहरा गया है। वहीं भाजपा और मुख्यमंत्री ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों द्वारा उज्जैन क्षेत्र में लगभग 168 एकड़ भूमि और करीब 137 प्लॉट खरीदे जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि इन जमीनों की खरीद उन इलाकों में की गई, जहां सरकार की प्रस्तावित विकास परियोजनाएं, सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं लागू होनी थीं। विपक्ष का कहना है कि इससे भूमि के दामों में भारी बढ़ोतरी की संभावना थी।

कांग्रेस ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश तथा अन्य नेताओं ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि सरकारी योजनाओं की जानकारी का उपयोग निजी लाभ के लिए किया गया है, तो यह गंभीर हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला हो सकता है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग भी की है।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि जनता के बीच पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि आरोपों से "नैतिकता, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक पद के दुरुपयोग" जैसे गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

मुख्यमंत्री और भाजपा की सफाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके और उनके परिवार की भूमि संपत्ति में मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई अनुचित वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार वर्षों से वैध रूप से रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और सभी खरीद-फरोख्त कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी आरोपों को "पूरी तरह बेबुनियाद" बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्ष 2017 में ही संबंधित कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा का दावा है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए झूठा प्रचार कर रहा है।

क्या है मुख्य विवाद?
विवाद का केंद्र यह है कि जिन इलाकों में भूमि खरीदी गई, वहां बाद में सड़क, हाईवे और अन्य विकास परियोजनाओं की घोषणा हुई। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी पद पर रहते हुए मिली जानकारी का लाभ उठाया गया, जबकि सरकार और मुख्यमंत्री पक्ष का कहना है कि कई भूमि सौदे मुख्यमंत्री बनने से पहले के हैं और इन्हें व्यवसायिक गतिविधि के रूप में देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक घमासान तेज
मामले को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां कांग्रेस इसे "महाकाल भूमि घोटाला" बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की साजिश करार दे रही है। फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक जांच एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार सिद्ध नहीं किया गया है और आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।