मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित IIMUN (India's International Movement to Unite Nations) के 15वें वार्षिक युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी (Gen Z) की चिंताएं वास्तविक हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब संवाद के अन्य रास्ते बंद हो जाते हैं, तब आंदोलन समाज और सरकार का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित करते हैं।
भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाज को विभाजित करना नहीं, बल्कि सहमति बनाना और व्यवस्था में सकारात्मक सुधार लाना होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी बात तथ्यों, तर्क और जिम्मेदारी के साथ रखें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में अभी कई सुधारों की आवश्यकता है। छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उन्हें समाधान देना सरकार व समाज दोनों की जिम्मेदारी है। भागवत ने कहा कि यदि युवाओं की आवाज समय पर सुनी जाए तो कई विवाद और आंदोलन टाले जा सकते हैं।
IIMUN के इस कार्यक्रम में देशभर से लगभग 2,000 से अधिक Gen Z और Gen Alpha छात्र शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के दौरान भागवत ने छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया।
🔎 मुख्य बिंदु (Key Points)
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने IIMUN युवा सम्मेलन को संबोधित किया।
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कहा कि Gen Z की शिकायतें वास्तविक हैं और उन्हें सुना जाना चाहिए।
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लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को संवाद का वैध माध्यम बताया।
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शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
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मुंबई में आयोजित सम्मेलन में 2,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।