नई दिल्ली: टेलीकॉम कंपनियों के डेली डेटा लिमिट वाले रिचार्ज प्लान को लेकर संसद में नया विवाद खड़ा हो गया है। आम यूजर्स को हर दिन मिलने वाली 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा लिमिट के खत्म होते ही बचा हुआ डेटा एक्सपायर हो जाता है, जबकि उसकी पूरी कीमत पहले ही वसूल की जा चुकी होती है। इसी मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाते हुए डेटा रोलओवर और यूजर फ्रेंडली पॉलिसी लागू करने की मांग की गई।
संसद में कहा गया कि अगर किसी यूजर को 2GB डेटा का प्लान दिया गया है और वह दिनभर में केवल 1.5GB डेटा ही इस्तेमाल करता है, तो बचा हुआ 0.5GB डेटा आधी रात के बाद अपने-आप खत्म हो जाता है। इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान होता है और उन्हें बार-बार उसी लिमिट के लिए भुगतान करना पड़ता है।
इस मुद्दे पर टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखी गईं।
✅ संसद में रखी गई प्रमुख मांगें
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डेटा रोलओवर की सुविधा: जो डेटा दिन के अंत तक उपयोग नहीं होता, उसे अगले दिन की डेटा लिमिट में जोड़ने की व्यवस्था लागू की जाए।
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अनयूज्ड डेटा का रिचार्ज में एडजस्टमेंट: अगर कोई यूजर लगातार कम डेटा उपयोग करता है, तो अगले महीने के रिचार्ज में उस डेटा वैल्यू का डिस्काउंट या एडजस्टमेंट दिया जाए।
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डेटा ट्रांसफर का विकल्प: यूजर अपने बचा हुआ डेटा परिवार या दोस्तों को ट्रांसफर कर सके, जिससे डेटा को डिजिटल संपत्ति जैसा अधिकार मिल सके।
📊 टेलीकॉम सेक्टर पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये मांगें लागू होती हैं तो टेलीकॉम कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल डेटा अब केवल सुविधा नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है।