📍 मुंबई, 1 दिसंबर 2025:
भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नया रिकॉर्ड निम्न स्तर छू लिया है। बुधवार के शुरुआती कारोबार में रुपये की विनिमय दर ₹90.14 प्रति डॉलर देखने को मिली।
हालाँकि बाद में हल्की सुधर के साथ बंद हुआ, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि रुपये में कमजोरी गहराई है। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी पूंजी प्रवाह (FPI), भारत-अमेरिका ट्रेड डील की अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक दबाव रुपये के गिरने के प्रमुख कारण बने हुए हैं।
🔎 क्यों गिर रहा INR — मुख्य कारण
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🌍 विदेशी निवेश (FPI) और निवेशकों का बाहर निकलना — कई विदेशी पूंजी निवेशकों ने 2025 में इक्विटी से पैसा निकाला।
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📉 भारत-अमेरिका व अन्य अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डीलों में अनिश्चितता — जिससे निर्यात व व्यापार संतुलन पर दबाव।
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🛢 कच्चे तेल व अन्य इंपोर्टेड कच्चे माल की बढ़ती कीमतें — भारत को अधिक डॉलर खर्च करना पड़ रहा है।
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🌐 विदेशी मुद्रा आरक्षित में गिरावट — रिज़र्व बैंक के पास डॉलर की सप्लाई सीमित।
📉 रुपये की गिरावट से आम जनता व अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
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प्रभावित क्षेत्र |
असर / संभावित दिक्कतें |
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🛒 इंपोर्टेड वस्तुएँ |
इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाइयाँ, पेट्रोल-डीज़ल आदि महँगी होंगी |
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✈️ विदेश यात्रा / शिक्षा खर्च |
हॉस्टल, ट्यूशन, टिकट आदि का खर्च बढ़ेगा |
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🧑💼 किराना, रोजमर्रा के सामान |
आयातित सामानों पर निर्भरता वाले वस्त्र व सामान महँगे होंगे |
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💼 कंपनियों की लागत |
इंपोर्ट लागत बढ़ने से सामान व सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं |
📊 इसके विपरीत, कुछ क्षेत्र — जैसे निर्यात आधारित उद्योग (IT, फार्मा, हाइड्रोकार्बन) — रुपये के गिरने से लाभ उठा सकते हैं, क्योंकि डॉलर में कमाई रुपये में अधिक होती है।
✅ सरकार व रिज़र्व बैंक के लिए चुनौतियाँ
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विदेशी निवेश की वापसी रोकना, ताकि रुपये पर दबाव कम हो सके।
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आयात-निर्यात संतुलन बनाए रखना — ज्यादा तेल व कच्चा माल आयात न करना।
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महंगाई व वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण — आम जनता को राहत देना।
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यदि आवश्यक हो, तो मौद्रिक नीतिगत हस्तक्षेप: जैसे REPO-rate, डॉलर बिक्री, विदेशी मुद्रा रिज़र्व संरक्षण आदि।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना ठोस कदमों के, रुपये की गिरावट आगे और संभव है — ₹90–92 प्रति डॉलर तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।