📍 नई दिल्ली, 10 नवंबर 2025
देश के चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने आज एक अहम बातें कही हैं कि India की भौगोलिक स्थिति उसे इंडो-प्रशांत क्षेत्र में “पसंदीदा साझेदार” बनाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब युद्ध केवल “भूमि, वायु और जल” तक सीमित नहीं रहा — बल्कि साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक (cognitive) क्षेत्र भी नए मोर्चे बन चुके हैं।
🔍 प्रमुख बिंदु
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जनरल चौहान ने कहा कि भारत को नए युद्ध-क्षेत्रों के लिए तैयार रहना चाहिए — “परंपरागत युद्ध अब पर्याप्त नहीं हैं।”
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति उसे “इंडो-प्रशांत का महत्वपूर्ण भाग” बनाती है, जो रणनीतिक तौर पर किसी भी बड़े शक्ति-संतुलन में अहम भूमिका निभा सकती है।
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सीडीएस ने संकेत दिए कि आगे की चुनौतियाँ अब सिर्फ हथियार और सैनिक नहीं, बल्कि सूचना युद्ध, नेटवर्क युद्ध और अंतरिक्ष से जुड़े हमलों की होंगी।
📌 क्या इसका मतलब क्या है?
यह बयान भारत की रक्षा-नीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है — जहाँ भारत अब
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रक्षा-सहयोग की दिशा नए घटक ले सकती है — जैसे कि इंडो-प्रशांत में गठबंधनों (Quad जैसे) में भारत की भूमिका बढ़ सकती है।
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रक्षा-उद्योग व तकनीकी विकास में “खुद-निर्भर भारत” की रणनीति को और बल मिलेगा।
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भविष्य में सीमाओं पर तनाव के लिए तैयार रहने के बजाय, समय से पहले तैयारियों पर ज़ोर दिया जाएगा।
✅ निष्कर्ष
सीडीएस जनरल चौहान के बयान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि भारत अब