गुजरात में साइबरक्राइम का तांडव: नौ महीनों में ₹1,011 करोड़ से अधिक का घोटाला

📍 अहमदाबाद, 10 नवंबर 2025
गुजरात ने 2025 के पहले नौ महीने में साइबरक्राइम के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाया है — राज्य में इस अवधि में लगभग ₹1,011 करोड़ का साइबर फ्रॉड हुआ, जिसमें करीब 1.42 लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं।
राज्य के अपराध जांच विभाग (CID) ने इस वृद्धि को दो प्रमुख कारणों से जोड़ा है: एक ओर बढ़ती सार्वजनिक जागरूकता, दूसरी ओर अपराधियों द्वारा अपनाई गई सोशल इंजीनियरिंग और हाई-टेक फ्रॉड तकनीकें। 

 

📈 स्थिति गम्भीर क्यों है?

  • रोजाना लगभग 521 नए साइबर फ्रॉड केस दर्ज हो रहे हैं — जो कि 2020 के दैनिक औसत (≈155.5) से तीन गुना से अधिक हैं। 

  • फ्रॉड की राशि प्रति केस थोड़ा ही बदली है — 2020 में औसतन ₹70,313 थी, और 2025 में ₹71,204 के करीब। लेकिन संख्या इतनी तेजी से बढ़ी है कि कुल शिकायते और नुकसान में भारी उछाल आया है। 

  • सबसे ज़्यादा निशाना पेंशन धारक और बुजुर्ग रहे — फ्रॉड्स में ऐसे लिंक, एपीके डाउनलोड और फेक पोर्टल्स उपयोग में लिए गये जो सीधे बैंक खाते खाली कर देते हैं। 

 

🛡️ चुनौती और प्रतिक्रिया

CID अधिकारियों का कहना है कि

“घोटाले बड़ी रकम के ही नहीं हो रहे — छोटे-मोटे फ्रॉड्स भी उतने ही घातक हैं क्योंकि बहुत कम लोग उन्हें दर्ज कराते हैं।” 

 

प्रमुख सुझाव यह हैं:

  • डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देना — बैंक खाते, मोबाइल एप्स, लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी।

  • सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना कि “अगर कोई बहुत अच्छा ऑफर दे रहा है, तो एक बार सोचें।”

  • बैंकों और प्लेटफॉर्म्स द्वारा तत्काल फ्रीजिंग और शिकायत दाखिल करने की प्रक्रिया तेज करना।

 

🧩 क्या करें?

  • व्यक्तिगत स्तर पर: किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले स्रोत देखें, एप डाउनलोड करे तो केवल आधिकारिक स्रोत से।

  • पारिवारिक स्तर पर: बुजुर्गों को समझाएँ कि कोई बैंक नहीं अचानक कॉल करके उनसे बैंकिंग जानकारी नहीं मांगता।

  • सरकारी स्तर पर: साइबर-इंवेस्टिगेशन क्षमता को बढ़ाया जाए, और राज्य-सरकारें इस दिशा में प्रायोगिक मॉडेल अपनाएँ।