📍 अहमदाबाद, 25 नवंबर 2025 (मंगलवार):
गुजरात की पुलिस ने हाल-ही में एक राज्यव्यापी सत्यापन अभियान पूरा किया जिसमें पाया गया कि 29,508 जिनमें से 17,628 आरोपियों का पता नहीं चल पाया है। ये आरोपी ऐसे हैं जो पिछले 30 वर्षों में UAPA, Arms Act, NDPS आदि कर्तव्यहीन अपराधों में नामजद थे।
🔍 प्रमुख बिंदु
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अभियान की अवधि थी 100 घंटे, जिसमें ‘33 रिस्पॉन्स टारगेट’ निर्धारित थे।
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कुल 11,880 आरोपी स्थानीय स्तर पर मिले, यानी लगभग 40 % ही सत्यापन के दायरे में आए।
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4,506 आरोपी राज्य बाहर हैं, 3,744 ने पता बदल लिया है, जिससे पुलिस को ट्रैक करने में बड़ी समस्या आई है।
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पुलिस महानिदेशक Vikas Sahay ने कहा कि दूसरी चरण का अभियान अब देखा जा रहा है जिसमें इंटर-स्टेट समन्वय बढ़ाया जाएगा।
🧭 क्या यह संकेत है?
यह परिणाम दर्शाता है कि देश में रुटेड अपराधी-नेटवर्क अब ट्रैक बाहर पहुँचने में सक्षम हो रहे हैं, जहाँ जानकारी अपडेट नहीं है, स्थान बदल चुके हैं और समन्वय की कमी है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल अपराधों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं — ट्रैकिंग, वेरिफिकेशन और डेटा-इंटीग्रिटी की भी आवश्यकता है।
✅ निष्कर्ष
गुजरात पुलिस की इस खुलासा ने संकेत दिया है कि प्रहरी-दृष्टि को केवल “नामजद” तक सीमित नहीं रखा जा सकता। ट्रैकिंग, आधुनिक डेटा-सिस्टम्स, अंतर-राज्यीय समन्वय और समय-प्रतिक्रिया क्षमता को और मज़बूत करने की जरूरत है।