नई दिल्ली/पेरिस: यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी (Heatwave) की चपेट में है। फ्रांस, इटली, स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और बाल्कन देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। कई देशों में जून महीने के पुराने तापमान रिकॉर्ड टूट गए हैं, जबकि हजारों लोग अस्पतालों में भर्ती हुए हैं और सैकड़ों अतिरिक्त मौतों की खबर सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का गंभीर संकेत है।
कई देशों में टूटा तापमान का रिकॉर्ड
यूरोप के कई देशों में जून 2026 अब तक का सबसे गर्म जून साबित हो रहा है। ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड ने जून के नए तापमान रिकॉर्ड दर्ज किए हैं, जबकि फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के कई शहरों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जर्मनी ने भी नया सर्वकालिक तापमान रिकॉर्ड दर्ज किया है।
सैकड़ों मौतें, बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, 21 जून के बाद से यूरोप में अत्यधिक गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। फ्रांस में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतों की सूचना मिली है। सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को बताया गया है।
जंगलों में आग और बुनियादी ढांचे पर असर
भीषण गर्मी के कारण इटली, क्रोएशिया, अल्बानिया और बाल्कन क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई जगह सड़कों की सतह पिघलने, रेल पटरियों के मुड़ने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ देशों में स्कूल बंद करने पड़े हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों को रद्द किया गया है।
क्या है इस भीषण गर्मी का कारण?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार यूरोप में "हीट डोम" (Heat Dome) और "ओमेगा ब्लॉक" (Omega Block) जैसी मौसमीय परिस्थितियों ने गर्म हवा को लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रोक दिया। इसके साथ ही उत्तरी अफ्रीका से आने वाली गर्म हवाओं ने तापमान को और बढ़ा दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानव गतिविधियों से बढ़ रहे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ने इस तरह की चरम गर्मी की घटनाओं को पहले की तुलना में कई गुना अधिक संभावित बना दिया है। एक अध्ययन के अनुसार, वर्तमान जैसी भीषण गर्मी बिना मानवजनित जलवायु परिवर्तन के लगभग असंभव थी।
यूरोप जलवायु परिवर्तन के लिए कितना संवेदनशील?
WHO के अनुसार, 2003 की यूरोपीय गर्मी में लगभग 70,000 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2022 की गर्मी में भी 60,000 से अधिक लोगों की जान गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यूरोप में हीटवेव की घटनाएं और अधिक तीव्र तथा बार-बार हो सकती हैं।
सरकारों ने क्या कदम उठाए?
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कई देशों ने रेड हीट अलर्ट जारी किए हैं।
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सार्वजनिक स्थानों पर कूलिंग सेंटर बनाए गए हैं।
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लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
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अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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स्कूलों के समय में बदलाव और कुछ स्थानों पर अस्थायी बंदी की गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में यूरोप समेत पूरी दुनिया को और भी अधिक घातक हीटवेव का सामना करना पड़ सकता है। उनका मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा, हरित बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूलन उपायों में तेजी लाना अब समय की मांग है।