Meta India के खिलाफ FIR दर्ज, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का मामला; दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच

नई दिल्ली: सोशल मीडिया कंपनी Meta India की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने कंपनी के प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) की कथित उपलब्धता के मामले में FIR दर्ज की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के निर्देश के बाद यह कार्रवाई की गई है।

NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि आयोग के निर्देशों पर दिल्ली पुलिस ने Meta India के प्लेटफॉर्म्स से जुड़े इस मामले में FIR दर्ज की है।

Instagram विज्ञापनों को लेकर शुरू हुआ था विवाद

यह मामला जुलाई 2026 में BBC Eye की एक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद चर्चा में आया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि भारत में Instagram पर कुछ पेड विज्ञापन ऐसे शब्दों और संकेतों के साथ दिखाई दिए, जो कथित तौर पर यूजर्स को Telegram चैनलों तक पहुंचाते थे। इन चैनलों पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए थे।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सरकारी एजेंसियों और बाल अधिकार संस्थाओं ने मामले का संज्ञान लिया। सूचना एवं प्रसारण नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से जवाब मांगा और संबंधित विज्ञापनों को हटाने के निर्देश दिए।

NHRC और NCPCR ने भी की कार्रवाई

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को जांच करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

वहीं, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी Meta India के अधिकारियों से जवाब मांगा। आयोग ने कंपनी के प्रबंध निदेशक और भारत प्रमुख को मामले की जांच के सिलसिले में तलब किया था।

इस पूरे मामले में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और उन्हें रोकने के लिए कंपनी की ओर से क्या कदम उठाए गए।

Meta ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कहा?

Meta पहले भी कह चुका है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री उसके प्लेटफॉर्म की नीतियों का उल्लंघन करती है। कंपनी ने अक्टूबर में अपने सुरक्षा उपायों और AI आधारित पहचान प्रणाली को मजबूत करने की जानकारी दी थी।

India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, Meta ने बताया था कि जनवरी से जून 2026 के बीच भारत में Facebook और Instagram पर ऐसी सामग्री से जुड़े 53 लाख मामलों में कार्रवाई की गई। कंपनी का दावा था कि इनमें से 98 प्रतिशत से अधिक मामलों की पहचान यूजर्स की शिकायत से पहले ही कर ली गई थी।

Meta ने यह भी कहा था कि अपराधी अब सामान्य दिखने वाले विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को बाहरी वेबसाइटों या दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। कंपनी ने ऐसे विज्ञापनों और उनसे जुड़े लिंक की पहचान करने के लिए AI तकनीक बढ़ाने की बात कही थी।

अब आगे क्या होगा?

FIR दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस मामले की जांच करेगी। जांच में विज्ञापनों, संबंधित डिजिटल खातों, बाहरी लिंक और कंपनी की ओर से उठाए गए कदमों की पड़ताल हो सकती है। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि संबंधित कानूनों के तहत कंपनी की रिपोर्टिंग और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का पालन हुआ या नहीं।

फिलहाल FIR में किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसमें किसे आरोपी बनाया गया है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

निष्कर्ष: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ा यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब दिल्ली पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि Meta के प्लेटफॉर्म्स पर कथित रूप से ऐसे विज्ञापन कैसे पहुंचे और उन्हें रोकने में कहां चूक हुई। ध्यान रहे कि FIR दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है, दोष साबित होना नहीं।

मुख्य बिंदु

  • दिल्ली पुलिस ने NHRC के निर्देश पर Meta India से जुड़े मामले में FIR दर्ज की।

  • मामला Meta के प्लेटफॉर्म्स पर कथित CSEAM सामग्री की उपलब्धता से जुड़ा है।

  • जुलाई में BBC Eye की रिपोर्ट के बाद मामला चर्चा में आया था।

  • NCPCR ने भी Meta India के अधिकारियों को तलब किया था।

  • Meta ने AI आधारित सुरक्षा उपाय मजबूत करने और सामग्री हटाने की कार्रवाई का दावा किया है।

  • FIR दर्ज होने का अर्थ दोष साबित होना नहीं है।