नई दिल्ली/पटना: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा विवाद और कथित पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के बीच बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी तथा दर्ज की गई सभी FIR और अन्य कानूनी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी।
यह फैसला छात्र संगठनों और आंदोलन का समर्थन कर रहे CJP (समाचार रिपोर्ट के अनुसार) की प्रमुख मांगों में शामिल था। सरकार के इस आश्वासन को छात्र आंदोलन की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि CJP ने यह भी कहा है कि यदि सरकार अपने वादों को पूरी तरह लागू नहीं करती है, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि 26 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे तक हुए प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIR, आपराधिक शिकायतें और अन्य कानूनी नोटिस वापस लिए जाएंगे। साथ ही, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को भी रिहा करने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया है।
पिछले कुछ दिनों से बिहार समेत कई राज्यों में छात्र कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। बिहार में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर विवाद भी सामने आया था। एक मामले में सिवान में प्रदर्शन के दौरान AK-47 से हवा में फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित भी किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सरकार का यह फैसला तनाव कम करने और छात्रों के साथ संवाद बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि आंदोलन से जुड़े संगठनों ने कहा है कि वे सरकार द्वारा किए गए सभी वादों के क्रियान्वयन पर नजर बनाए रखेंगे।
🔎 मुख्य बिंदु (Key Points)
-
बिहार सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई न करने का ऐलान किया।
-
दर्ज सभी FIR और कानूनी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।
-
हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई का भी आश्वासन।
-
CJP ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन वादे पूरे न होने पर आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी दी।
-
मामला NEET-UG परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन से जुड़ा है।