📍 पटना / नई दिल्ली, 16 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नतीजे आते ही राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है — कैसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को लगभग वही वोट मिले जो 2020 में मिले थे, फिर भी एनडीए गठबंधन ने 200 सेटों के पार पहुँचने में सफलता हासिल की।
विश्लेषकों ने पाया है कि इसमें मुख्य भूमिका निभाई है सीटों का रणनीतिक बंटवारा, सहयोगी दलों की कार्यकुशलता तथा हम-खास मुकाबले में महागठबंधन की कमजोर तैयारी ने।
🔍 कायदे-के-नियम के बाहर हुए बदलाव
वोट शेयर में मामूली बदलाव
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राजद का वोट शेयर 2020 में 23.11 % था, अब 2025 में लगभग 23.00 % ही रहा।
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भाजपा का वोट शेयर 2020 में 19.46 % था; 2025 में 20.08 % हुआ।
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लेकिन एनडीए का समग्र वोट शेयर 2025 चुनाव में लगभग 46.6 % रहा, जबकि महागठबंधन का लगभग 37.9 %।
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पार्टी |
वोट शेयर (2020 में) |
वोट शेयर (2025 में) |
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RJD |
23.11% |
23.00% |
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BJP |
19.46% |
20.08% |
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JDU |
15.39% |
19.25% |
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INC |
9.48% |
8.71% |
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LJPRV |
5.66% |
4.97% |
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CPI(ML)(L) |
3.16% |
2.84% |
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AIMIM |
1.24% |
1.85% |
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CPI |
0.83% |
0.74% |
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CPM |
0.65% |
0.60% |
फर्क दिखा सीटों में
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भाजपा ने 101 सीटों पर लड़ाई लड़ी और 89 जीत हासिल की — स्ट्राइक रेट लगभग 89 %।
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राजद ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 25 जीत पाए — स्ट्राइक रेट लगभग 18 % ही।
🧭 क्यों हुआ ऐसा बदलाव?
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सहयोगी दलों का बेहतर समन्वय
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एनडीए में गठबंधन दलों ने सीट बंटवारा और रणनीति को बेहतर तरीके से लागू किया।
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एनडीए के भागीदारों ने वोटबैंक के साझा उपयोग में सफलता पाई।
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महागठबंधन की रणनीति ध्वस्त
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राजद-महागठबंधन के सहयोगी दलों ने अपेक्षित प्रदर्शन नहीं दिया और वोट साझा एवं समन्वित रूप से नहीं जुटा पाए।
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महागठबंधन को इसलिए सिर्फ 35 सीटें मिलीं।
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वोट शेयर से सीटों का अनुकूल रूपांतरण
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भाजपा-जेडीयू (एनडीए साझेदार) ने कम सीटों पर ही फोकस किया और प्रत्येक सीट पर जीत की रणनीति अपनाई।
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राजद ने अधिक सीटों पर लड़ा लेकिन कम जीत हासिल की; इसका असर था कि वोट तो मिले मगर सीटों में परिणित नहीं हुए।
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क्षेत्रीय रणनीति, वोट बैंक का प्रबंधन
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एनडीए ने पिछड़ों, अति-पिछड़ों, महिलाओं और युवा वोटर्स में बेहतर पहुँच बनाई।
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राजद-महागठबंधन में वोटर आकांक्षाएँ थीं लेकिन उनका सक्रिय उपयोग-रणनीति नहीं उतनी असरदार थी।
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