भागलपुर, बिहार: भागलपुर में अधिवक्ता आलय बनर्जी एवं हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमोद कुमार के साथ कई पत्रकारों ने प्रेस वार्ता कर जोगसर थाना पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। यह प्रेस वार्ता 23 अप्रैल 2026 को दर्ज एफआईआर और हिरासत में लिए जाने के बाद कोर्ट से रिहाई के उपरांत आयोजित की गई।
प्रेस वार्ता में अधिवक्ता आलय बनर्जी ने कहा कि पत्रकारों द्वारा शहर के एक रेस्टोरेंट में कथित अनैतिक गतिविधियों का स्टिंग ऑपरेशन किया जा रहा था, लेकिन जोगसर थाना प्रभारी द्वारा साक्ष्यों को नजरअंदाज करते हुए पत्रकारों के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
उन्होंने बताया कि मामले में पांचों पत्रकारों को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया गया, जहां जांच के बाद उन्हें साधारण मुचलके पर रिहा कर दिया गया। न्यायालय ने पत्रकारों की पहचान सत्यापित कर पुलिस हिरासत में रखने से इनकार किया।
हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमोद कुमार ने आरोप लगाया कि जोगसर थाना प्रभारी और रेस्टोरेंट संचालक के बीच मिलीभगत के चलते पत्रकारों को साजिश के तहत फंसाया गया। उन्होंने कहा कि यह न केवल कानून का दुरुपयोग है, बल्कि पत्रकारों की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाने का प्रयास है।
पत्रकार गौतम सुमन गर्जना ने कहा कि इस घटना ने पुलिस प्रशासन पर उनका भरोसा तोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना जांच के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पत्रकारों को फर्जी घोषित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं पत्रकार अरविंद कुमार यादव ने दावा किया कि रेस्टोरेंट में केबिन बनाकर संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिसकी सूचना मिलने पर वे स्टिंग ऑपरेशन करने पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की और उल्टे पत्रकारों पर ही आरोप लगा दिए।
पत्रकारों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वे दोषी हैं तो उनकी भी जांच की जाए, लेकिन साजिश के तहत फंसाने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में मौजूद अन्य पत्रकारों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया और उच्च स्तर पर जांच की मांग की।
🔑 मुख्य बिंदु (Key Points)
-
जोगसर थाना पुलिस की कार्रवाई पर पत्रकारों का विरोध
-
कोर्ट ने पांचों पत्रकारों को साधारण मुचलके पर रिहा किया
-
पुलिस पर साजिश और पक्षपात के आरोप
-
रेस्टोरेंट में कथित अनैतिक गतिविधियों का मामला
-
निष्पक्ष जांच की मांग