रिपोर्ट: समशेर मस्तान, भागलपुर (बिहार): अंग उत्थान आंदोलन समिति, बिहार-झारखंड के बैनर तले भागलपुर के पटल बाबू रोड स्थित दिवंगत कांग्रेसी नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा के आवास पर अंग-अंगिका भाषा के समुचित सम्मान एवं अधिकार को लेकर चिंतन बैठक आयोजित की गई। बैठक में अंगिका भाषा को भाषाई कोड दिलाने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को तेज करने का संकल्प लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमरेन्द्र ने की, जबकि संचालन समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जयंत जलद ने किया। केंद्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन गर्जना ने कहा कि वर्षों से अंगिका भाषा को उचित पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर अपेक्षित पहल नहीं हुई है। उन्होंने बिहार अंगिका अकादमी को पुनः सक्रिय करने और भाषा के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अंगिका भाषा के अध्ययन और शोध के बावजूद युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाई होने के बावजूद भाषा को व्यापक सरकारी मान्यता नहीं मिल पाई है। इसलिए अंगिका को भाषाई कोड, आठवीं अनुसूची में स्थान और विद्यालय से लेकर स्नातक स्तर तक पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।
बैठक में सर्वसम्मति से 24 एवं 25 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय अंगिका महोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दूबे को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने दूरभाष पर अपनी सहमति भी प्रदान की। इस घोषणा पर उपस्थित साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुशी व्यक्त की।
बैठक में डॉ. साकेत बिहारी शरण, डॉ. प्रेमचंद पांडेय, शीतांशु अरुण, गीतकार राजकुमार, शेखर खागड़ी सहित कई वक्ताओं ने अंगिका भाषा, संस्कृति और पहचान को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर आंदोलन चलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में दिवंगत कांग्रेसी नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।