अंग शिखर सम्मेलन बना सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का मंच, अंग प्रदेश के विकास का लिया संकल्प

रिपोर्ट: समशेर मस्तान, भागलपुर (बिहार): भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित अंग शिखर सम्मेलन में देश-प्रदेश के विद्वानों, चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में खानकाह-ए-पीर दमड़िया शाह के सज्जादानशीं सैय्यद शाह फखरे आलम हसन ने "सामाजिक समरसता" विषय पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए कहा कि सामाजिक समरसता ही विकसित और सशक्त समाज की सबसे मजबूत नींव है।

उन्होंने कहा कि सरकार, समाज और सामाजिक संस्थाओं को शिक्षा, न्याय, रोजगार, सेवा, संवाद और मानवीय मूल्यों के आधार पर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा मिल सके। उन्होंने अंग प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को सद्भाव, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक बताते हुए इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सैय्यद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अंग प्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सम्मेलन में अंग प्रदेश के अतीत, वर्तमान और भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर 12 विद्वानों ने अपने विचार रखे, जो समाज और क्षेत्र के विकास के लिए मार्गदर्शक साबित होंगे।

उन्होंने सफल आयोजन के लिए अंग मुक्ति दल के पदाधिकारियों, आयोजन समिति और विशेष रूप से कार्यक्रम के संयोजन एवं संचालन के लिए प्रो. देव ज्योति मुखर्जी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन से निकले सुझाव सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अंग प्रदेश के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सम्मेलन के अंत में उपस्थित प्रतिनिधियों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, शिक्षा, महिला सम्मान, युवाओं के सशक्तिकरण, नशामुक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सभी धर्मों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही अंग प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और समाज में भाईचारा मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया।